Written by Raj kumar on December 13, 2019

   नागरिकता संशोधन बिल क्या है
indian constitution - फोटो : Social Media
लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। हालांकि करीब आधी रात में यह विधेयक पास हो गया। मगर इससे पहले पक्ष और विपक्ष के करीब 48 सांसदों ने अपनी-अपनी बात रखी। इस दौरान तीन शब्द बार-बार आए। आर्टिकल-14, आर्टिकल-21 और आर्टिकल-25।
विपक्ष के नेताओं ने इन अनुच्छेदों का हवाला देते हुए विधेयक को गैर संवैधानिक बताया। जबकि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी भी तरह से आर्टिकल-14, 21 और 25 का उल्लंघन नहीं करता है। बहस सुनने के बाद हर किसी ने जानना चाहा कि आखिर ये आर्टिकल क्या है? आइए हम आपको विस्तार से बताते हैं इनके बारे में...
 
कानून द्वारा तय प्रक्रिया को छोड़कर किसी भी व्यक्ति को जीने के अधिकार या आजादी के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा।
यह भारत के नागरिक के मूलभूत अधिकारों में से एक है। 

आर्टिकल-25 : धार्मिक स्वतंत्रता

संविधान का आर्टिकल-25 देश के सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। इसके तहत प्रत्येक नागरिक को धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान अधिकार होगा। 

  नागरिकता संशोधन बिल 2019

नागरिकता संशोधन बिल कानून बन जाता है तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश सेआए हिन्दू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को लोगों को आसानी से भारतीय नागरिकता मिल जाएगी.
आज मोदी सरकार में गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल (CAB) राज्यसभा में पेश कर दिया है. अगर CAB कानून बन जाता है तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से अवैध तरीके से आए हिन्दू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को लोगों को आसानी से भारतीय नागरिकता मिल जाएगी. प्रधानमंत्री मोदी ने संसदीय दल की बैठक में बीजेपी के सभी राज्यसभा सांसदों से सदन में मौजूद रहने को कहा है. राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल को पास करवाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 121 का है. बीजेपी मोटे तौर पर इस मैजिक नंबर के पार लग रही है, लेकिन थोड़ा हेर-फेर बीजेपी का गेम बिगाड़ सकता है. नागरिकता संशोधन बिल 2019 में केंद्र सरकार के प्रस्तावित संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए अवैध दस्तावेजों के बाद भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा. नागरिकता संशोधन बिल का पूर्वोत्तर के राज्य विरोध कर रहे हैं. पूर्वोत्तर के लोग इस बिल को राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत से खिलवाड़ बता रहे हैं.

1. क्या है CAB का प्रस्ताव?

नागरिकता संशोधन बिल नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया जा रहा है. नागरिकता बिल 1955 के हिसाब से किसी अवैध प्रवासी को भारत की नागरिकता नहीं दी जा सकती. अब इस संशोधन से नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव होगा. यह बिल सोमवार को लोकसभा में पास हो चुका है.

2. CAB के दायरे में कौन आएगा?नागरिकता बिल में इस संशोधन से मुख्य रूप से छह जातियों के अवैध प्रवासियों को फायदा होगा. बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए अवैध दस्तावेजों के बाद भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा. वास्तव में इससे नॉन मुस्लिम रिफ्यूजी को सबसे अधिक फायदा होगा.

3. इसके दायरे से बाहर कौन रहेगा?
भारत के प्रमुख विपक्षी दलों का कहना है कि मोदी सरकार CAB के माध्यम से मुसलमानों को टार्गेट करना चाहती है. इसकी वजह ये है कि CAB 2019 के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी.

कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसी आधार पर नागरिकता संशोधन बिल का विरोध कर रही हैं. सरकार का तर्क यह है कि धार्मिक उत्पीड़न की वजह से इन देशों से आने वाले अल्पसंख्यकों को CAB के माध्यम से सुरक्षा दी जा रही है.

4. मोदी सरकार का तर्क क्या है?
 मोदी सरकार कहती है कि साल 1947 में भारत-पाक का बंटवारा धार्मिक आधार पर हुआ था. इसके बाद भी पाकिस्तान और बांग्लादेश में कई धर्म के लोग रह रहे हैं. पाक, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक काफी प्रताड़ित किये जाते हैं. अगर वे भारत में शरण लेना चाहते हैं तो हमें उनकी मदद करने की जरूरत है.

5. CAB का बैकग्राउंड क्या है?
जनवरी 2019 में बिल पुराने फॉर्म में पास किया गया था. CAB वास्तव में NDA का चुनावी वादा है. गृह मंत्रालय ने वर्ष 2018 में अधिसूचित किया था कि सात राज्यों के कुछ जिलों के अधिकारी भारत में रहने वाले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से सताए गए अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने के लिए ऑनलाइन आवेदन स्वीकार कर सकते हैं.

राज्यों और केंद्र से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उन्हें नागरिकता दी जाएगी. इसमें भारत की नागरिकता पाने के लिए 12 साल के निवास की जगह अब अवधि सात साल हो जाएगी.

6. CAB का विरोध कौन और क्यों कर रहा है?
विपक्षी दल CAB का विरोध कर रहे हैं. उनका तर्क है कि यह भारत के संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन करता है. आर्टिकल 14 समानता के अधिकार से संबंधित है. कांग्रेस, तृणमूल, सीपीआई (एम) जैसे दल CAB का विरोध कर रहे हैं. इसके साथ ही देश के पूर्वोत्तर के राज्यों में इस बिल का काफी विरोध किया जा रहा है.

7.भारत की आबादी पर CAB का प्रभाव?
इस समय तीन पड़ोसी देश से 31,313 लोग भारत में लंबी अवधि के वीजा पर रह रहे हैं. CAB से इन्हें तुरंत फायदा होगा. इसमें 25,000 से अधिक हिंदू, 5800 सिख, 55 इसाई, दो बौद्ध और दो पारसी नागरिक शामिल हैं.

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