Johnson & Johnson ने कोरोना वैक्सीन परीक्षण पर लगाई रोक, जानें क्या है मुख्य कारण
दुनियाभर में वैज्ञानिक कोरोना वायरस वैक्सीन को तैयार करने हेतु दिन-रात जुटे हुए हैं. विश्वभर में कोरोना वायरस संक्रमितों का आंकड़ा चार करोड़ के लगभग पहुंच गया है. कोरोना के टीके की खोज के लिए विभिन्न देशों में परीक्षण चल रहा है. इस बीच, अमेरिका की चिकित्सा उपकरण विनिर्माता कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने कोरोना वैक्सीन के ट्रायल को फिलहाल रोक दिया है.
जॉनसन एंड जॉनसन ने 12 अक्टूबर 2020 को कहा कि वह कोविड-19 (COVID-19) वैक्सीन के ट्रायल को अस्थायी रूप से रोक रहा है क्योंकि उसके प्रतिभागियों में से एक व्यक्ति बीमार हो गया है. कंपनी ने बयान में कहा कि हमने अपने कोविड-19 वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के लिए प्रतिभागियों को दी जाने वाली आगे की खुराक फिलहाल के लिए रोक दी है. इसमें फेज 3 का ट्रायल भी शामिल है
🔶कोरोना वैक्सीन परीक्षण सूची में शामिल
इस महीने की शुरुआत में, जॉनसन एंड जॉनसन अमेरिका में वैक्सीन तैयार करने वाली उन कंपनियों की सूची में शामिल हुआ, जो प्रायोगिक कोरोना वैक्सीन परीक्षण से आगे बढ़ते हुए मानव परीक्षण चरण में पहुंचा. जॉनसन एंड जॉनसन की एडी26-सीओवी2-एस वैक्सीन अमेरिका में चौथी ऐसी वैक्सीन है, जो क्लिनिकल ट्रायल के अंतिम चरण में है.
🔶एस्ट्राजेनेका ने भी परीक्षण पर रोक लगाया
एस्ट्राजेनेका ने भी इससे पहले कोरोना वैक्सीन के परीक्षण पर रोक लगा दी थी. परीक्षण के दौरान एक प्रतिभागी बीमार पड़ गया था, जिसके बाद कंपनी ने परीक्षण को रोक दिया. हालांकि, एस्ट्राजेनेका का कोरोना वैक्सीन परीक्षण दुनिया के कई देशों में जारी है, इसे केवल अमेरिका में ही रोका गया है.
🔶60 हजार लोगों पर वैक्सीन का परीक्षण
जॉनसन एंड जॉनसन ने जब इस वैक्सीन के अंतिम चरण के परीक्षण को शुरू किया था, तब कंपनी ने कहा था कि इसके तहत अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, चिली, कोलंबिया, मैक्सिको और पेरू में 60 हजार लोगों पर वैक्सीन का परीक्षण किया जाएगा. जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के ट्रायल पर रोक लगने की खबर ऐसे समय में आई है, जब इससे पहले एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर रोक लगा दी गई थी.
🔶कोरोना का कहर जारी
दुनिया भर के 180 से ज्यादा देशों को कोरोना वायरस अपने चपेट में ले चुका है. दुनिया में कोविड-19 संक्रमितों की कुल संख्या 3.74 करोड़ के पार पहुंच गई है. वहीं, 10.76 लाख मरीज़ इस वायरस की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं जबकि 2.60 करोड़ से ज्यादा मरीज़ कोरोना वायरस को मात देने में सफल हुए हैं.
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