आज हम मानवाधिकार और पुलिस के बारे ने पढ़ते है?
👉 मानवाधिकार सभी मनुष्यों को प्राप्त वे अधिकार हैं, जो सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक हैं।" - मानवाधिकार मानव मात्र को प्राप्त ऐसे अधिकार हैं जो मनुष्य की गरिमा और स्वतंत्रतामय जीवन के लिए आवश्यक हैं। ये अधिकार को प्राथमिकता: मौलिक अधिकार, नैसर्गिक अधिकार, जन्म से अधिकार आदि नामों से जाना जाता है।
👉 कई प्राचीन दस्तावेजों में ऐसे कई दस्तावेजों मिलते हैं, जिन्हें मानवाधिकारों के रूप में चिंहित किया जा सकता है। आधुनिक मानवाधिकार कानून और मानवाधिकार की अधिकांश प्राथमिकताओं समसामयिक इतिहास से संबंधित हैं। 'द टवल्ल्व कलाकार' डी ब्लैक ब्लैक फॉरेस्ट '(1525) को यूरोप में मानवाधिकारों का सर्वप्रथम दस्तावेज माना जाता है। यह जर्मनी के किसान विद्रोह स्वायत्त संघ के समक्ष उठाई गई किसानों की मांग का एक हिस्सा है।
👉 1776 में संयुक्त राज्य अमेरिका 1789 में फ्रांस में दो प्रमुख क्रान्तियां घटी हैं जिसके फलस्वरूप क्रमशः संयुक्त राज्य की स्वतंत्रता की घोषणा और फ्रांसीसी लोगों की मानव और नागरिकों के अधिकारों का अभिग्रहण हुआ।
मानवाधिकार की सुरक्षा निश्चित करना किसी भी सभ्य समाज के लिए अनिवार्य है। दूसरे शब्दों में, मानवाधिकारों का संरक्षण या उल्लंघन किसी भी देश, राष्ट्र या समाज की प्रगति, विकास और प्रगति का मापदण्ड है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के तत्वाधान में 10 दिसंबर 1948 को मानवाधिकारों की सर्वमान्य घोषणा की गयी थी। इस उपलक्ष्य में 10 दिसंबर का दिन प्रति वर्ष मानवाधिकार दिवस के रूप में विश्वभर में मनाया जाता है। भारती संविधान की प्रस्तावना में स्वयं ही संयुक्त राष्ट्र संघ चार्टर में वर्णित मानवाधिकार सम्बन्धी सभी विचारों, आदर्शों, मूल्यों, मानकों और शब्दावली का समुचित रूप से वर्णन किया गया है। मानवाधिकारों की यह घोषणा सभी राष्ट्रों के लिए अनुकरणीय है।
👉 संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा-पत्र में प्रस्तावना का उद्देश्य विश्व समुदाय में स्वतंत्रता, न्याय और शांति की स्थापना है। अनुच्छेद प्रथम और द्वितीय के अन्तर्गत मानव की गरिमा, स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्व की भावना पर बल दिया गया है। ये जाति, वर्ण, लिंग, धर्म, भाषा, राजनीतिक विचार, आर्थिक स्थिति, जन्म, जन्म-स्थान या किसी अन्य स्थिति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव या पक्षपात वर्जित माना गया है। अनुच्छेद तीन, चार और पांच के अनुसार दासता को वर्जित किया गया है और इस बात का प्रावधान किया गया है कि किसी को भी_ किसी के प्रति क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार करने का अधिकार नहीं है। अनुच्छेद 18, 19 और 20 में निजी विचारों की अभिव्यक्ति की और धार्मिक स्वतंत्रता के अतिरिक्त शान्तिपूर्ण संघ और संगठन के विषय में उल्लेख किया गया है।
👉 पुलिस के खिलाफ मानवाधिकार: पुलिस कार्यवाही के खिलाफ आम आदमी को निम्नलिखित मानवाधिकार प्राप्त हैं -
1) गिरफ्तारी के समय पुलिस क्या नहीं कर सकती:
• सामान्य बल का प्रयोग नहीं कर सकता।
• गिरफ्तारी के दौरान अभियुक्त और उसके परिवार के साथ गली गलौज नहीं कर सकते।
• मारपीट व अन्य अमानवीय व्यवहार नहीं कर सकते।
• निराधार गिरफ्तारी नहीं कर सकते।
• गिरफ्तार व्यक्ति की वापसी को ठेस पहुंचाने का कार्य नहीं कर सकता।
2) तलाशी के दौरान पुलिस क्या नहीं कर सकती
• तलाशी के समय किसी व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार नहीं कर सकता।
• सामान्य स्तिथियों में रात्रि कल में तलाशी नहीं कर सकती।
• कोई भी जगह अनधिकृत प्रवेश नहीं कर सकता है।
• महिला और बच्चो के साथ दुर्वुहार नहीं कर सकते।
• किसी भी योग्य या वांछित वास्तुकार के आलावा उस जगह की अन्य वस्तुओ के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता।
• ज़ब्ती सूचि में दर्ज किए बगैर कोई सामग्री नहीं उठा सकती।
3) गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को निम्नलिखित लिखित कार्य करना चाहिए:
• गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण बताना चाहिए।
• गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत सम्बन्धी सुहाना देना चाहिए।
• गिरफ्तारी के बाद अपराधी का मेडिकल टेस्ट होना चाहिए।
• गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को चौबीस घंटे के भीतर जिसमें धार्मिक आधार के सामने ले जाना चाहिए।
• महिला, बच्चे, बीमार और वृद्ध व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
• जब तक आवश्यक प्रतीत हो न हो गिरफ्तार व्यक्ति को हथकड़ी नहीं लगाना चाहिए।
👉 अतः हम कह सकते हैं कि मानवाधिकार सभी मनुष्यों को प्राप्त वे अधिकार हैं, जो अंतर्निहित हैं, अहिंसात्मक हैं, अपरिवर्तनीय हैं और मनुष्य के ग्राफिकमामय जीवन के लिय आवश्यक हैं। इन अधिकारों को कोई नहीं छीन सकता है। मूल अधिकारों के रूप में भारतीय संविधान इनका संरक्षक है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व मानवाधिकार परिषद और भारत में राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग मानवाधिकारों के संरक्षण हेतु सतत् प्रयासरत हैं।


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