ब्लैक होल तथा सापेक्षता का सिद्धांत - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख




संदर्भ: -

●इस बार भौतिक विज्ञान के क्षेत्र का नोबल पुरस्कार एस्ट्रोफिजिक्स के क्षेत्र में कार्य करने वाले तीन वैज्ञानिको को दिया गया

परिचय :-

●भौतिकी में भी वर्ष 2020 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा के अनुसार फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों रोजर पेनरोज, रिनहार्ड गेंजेल और एंड्रिया गेज को दिया गया । इसमें पुरस्कार राशि का आधा भाग रोजर पेनरोज को ब्लैक होल निर्माण को आइंस्टीन की सापेक्षकता के सिद्ंधात से जुड़ाव की खोज के लिए और शेष संयुक्त रूप से रिनहार्ड गेंजेल और एंड्रिया गेज को गैलेक्सी के केंद्र में स्थित अत्यधिक घनत्व वाले पदार्थ (सुपरमैसिव कॉम्पैक्ट ऑब्जेक्ट) खोज के लिए दिया गया। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज, स्टॉकहोम के द्वारा इन पुरस्कारों को घोषणा की जाती है।

ब्लैकहोल का निर्माण

●किसी तारे में दो प्रकार के बल कार्य करते हैं। प्रथम तारे का गुरुत्वीय बल तथा द्वितीय तारे के ईंधन (हाइड्रोजन तथा हीलियम ) से होने वाला रेडियोएक्टिव बल। यदि उस तारे का ईंधन समाप्त हो जाता है तो अन्दर का रेडियोएक्टिव विस्फोट अब बाहर से दबाने वाली गुरुत्वाकर्षण बल को संतुलित नहीं कर पाती।

●अतः क्षण भर के अन्दर तारा सिकुड़ कर बहुत छोटा हो जाता है परन्तु इस अचानक और तीव्र संपींडन के कारण अन्दर का तापमान अरबों डिग्री हो जाता है। अब इस के कारण तारा एक विस्मयकारी विस्फोट अर्थात सुपरनोवा विस्फोट हो जाता है।

●इससे तारे के बाहरी तत्व बिखर जाते हैं जबकि केंद्र गुरुत्वाकर्षण के चलते और भी सिकुड़ता जाता है। विस्फोट के बाद जो पदार्थ बचता है वह धीरे धीरे सिमटना शुरू होता है और बहुत ही घने पिंड का रूप ले लेता है जिसे न्यूट्रॉन स्टार कहते हैं। अगर न्यूट्रॉन स्टार बहुत विशाल है तो गुरुत्वाकर्षण का दबाव इतना होगा कि वह अपने ही बोझ से सिमटता चला जाएगा और इतना घना हो जाएगा कि वे एक ब्लैक होल बन जाएगा।

ब्लैक होल के विषय में

●कृष्ण विवर या ब्लैक होल अंतरिक्ष में अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र वाली कोई खगोलीय वस्तु है, जिसके आकर्षण से प्रकाश-सहित कुछ भी नहीं बच सकता।

●ब्लैकहोल में एक ऐसा ऐसा स्थान है जहाँ पदार्थ में दबने के कारण अनंत घनत्व हो जाता है, गुरुत्वाकर्षण खिंचाव अनंत शक्तिशाली होता है। ब्लैक होल के केंद्र में इस शून्य-आयतन, अनंत रूप से सघन इस क्षेत्र को गुरुत्वीय सिंग्युलेरिटी कहा जाता है।

●एक बार ब्लैकहोल के क्षेत्र में प्रवेश करने के उपरांत प्रकाश भी वापस नहीं आ सकता। ब्लैकहोल के चारों ओर इवेंट होराइजन नामक एक सीमा होती है जो प्रकाश सहित किसि वस्तु के वापस लौटने की अंतिम सीमा है अर्थात इवेंट होराइजन को पार करने वाला पदार्थ ब्लैकहोल की गुरुत्वीय सीमा में प्रवेश कर जाता है।

●अंतरिक्ष ब्लैकहोल की स्थिति का पता ब्लैकहोल की अन्य पिंडो से अंतःक्रिया से पता चलता है। जब तारो अथवा पिंडो का समूह किसी रिक्त स्थान की परिक्रमा करे तो वह रिक्त स्थान ही ब्लैकहोल होता है।

●इसे "काला" (कृष्ण) इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को भी अवशोषित कर लेता है और कुछ भी परावर्तित नहीं करता। यह ऊष्मागतिकी में ठीक एक आदर्श कृष्णिका की तरह है। कालेछिद्र का क्वांटम विश्लेषण यह दर्शाता है कि उनमें तापमान और हॉकिंग विकिरण होता है।

सापेक्षता का सिद्धांत

●आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत मुख्य रूप से दो अवधारणाओं पर अपना आकार लेता है

प्रथम अवधारणा :-

●एक-दूसरे से सापेक्ष सीधी और समरूप गति से चलने में पिंड की गति भौतिकी के समान नियमों का पालन करती हैं। इसे गति की सापेक्षता भी कहते हैं।

●विशेष सापेक्षता की प्रथम उपधारणा की खोज आइंस्टीन ने नहीं बल्कि गैलिलिओ गैलीली (Galileo Galilei) ने की थी ।

द्वितीय अवधारणा :-

●इस उपधारणा के अंतर्गत आइंस्टीन ने यह माना कि प्रकाश का वेग हमेशा स्थिर रहता है तथा स्रोत अथवा प्रेक्षण की गति का उस पर कोई प्रभाव नही पड़ता।

●परंतु इस अवधारणा को भी पहले माइकसन-मोर्ले के प्रयोगों के बाद मान्यता मिल चुकी थी। “इस प्रकार आइंस्टीन ने इन दोनों अवधारणाओं को अलग अलग न प्रस्तुत कर एक साथ प्रस्तुत किया”

सापेक्षता सिद्धांत के कुछ प्रमुख निष्कर्ष :-

●टाइम डाईलेसन अर्थात समय भी निरपेक्ष नहीं है ,दो व्यक्तियों (या पिंडो ) जिनमे एक स्थिर व्यक्ति तथा एक व्यक्ति जो प्रकाश की चाल के लगभग बराबर के वेग से गतिमान है, के लिए बराबर व्यतीत किया गया समय की स्थिति में परिवर्तन रहता है।

●लेंथ कंट्रक्शन :-किसी यंत्र की गति जितनी ज्यादा बढ़ती है और किसी स्थिर प्रेक्षक को उसका आकार गति की दिशा में उतना ही सिकुड़ता होता नज़र आता है)